ईरान के सामने अमेरिका का संपूर्ण समर्पण

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ईरान के सामने अमेरिका ने संपूर्ण समर्पण कर दिया है. ये सिर्फ मैं नहीं कह रहा हूं. अमेरिका पूछा रहा है. मरीन कॉर्प्स में सेवा दे चुके अमेरिकी सांसद सेथ मॉल्टन बोल रहे हैं. मोजतबा खामेनेई की शर्तों पर डोनाल्ड ट्रंप ने शांति समझौता कर लिया है जिस पर 19 जून को जेनेवा में इस पर दस्तखत होंगे. दुनिया भर के देश बधाई हो – बधाई हो का संदेश भेज रहे हैं. हम सब त्रस्त जो थे. लेकिन ये बधाई ट्रंप की जीत की नहीं है. स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज खुलने जा रहा, इसकी है. 38 बार पीस डील की मिन्नत कर चुके ट्रंप इतने खोखले साबित होंगे किसी ने सोचा नहीं होगा. पाकिस्तान और कतर ने जो मेमोरैंडम ऑफ पीस तैयार किया है, ये इतिहास के कालखंड में अमेरिका की सबसे बुरी हार के तौर पर याद किया जाएगा. जो भी डिटेल सामने आई है, उसे देखने पर ग्लोबल पॉलिटिक्स की समझ न रखने वाला अदना सा शख्स भी ट्रंप पर हंसेगा. इसमें दो ही मुख्य बातें हैं – युद्ध तत्काल प्रभाव से खत्म होगा. सिर्फ ईरान में नहीं बल्कि लेबनान में भी. दूसरा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बिना टोल दिए खुल रहा है. अरे भाई, युद्ध 28 फरवरी को शुरू किसने किया था. इजरायल और अमेरिका ने. रही बात स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज की. ईरान तो जंग के दौरान भी कहता रहा कि जो देश इसमें शामिल नहीं है उनके लिए 23 किलोमीटर चौड़ा गलियारा खुला है. इसका ब्लॉक तो डोनाल्ड ट्रंप ने किया 13 अप्रैल को. वो भी खिसिया कर क्योंकि ईरान उनकी शर्तों पर सीजफायर के लिए तैयार नहीं हो रहा था. इस चक्कर में वहां फंसे जहाज पर भारत के ही तीन सेलर मार दिए गए. फिर समझौते में अमेरिका ने ही अपने ही ब्लॉकेड को हटाने का ऐलान किया है और ट्रंप से लेट्स ऑयल फ्लो बताकर हमें कह रहे – थैंक्यू फॉर योर अटेंशन.

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