क्या मायावती-चंद्रशेखर-ओवैसी साथ आएंगे? उत्तर प्रदेश चुनाव के पहले बिछने लगी बिसात

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अब चंद महीने दूर है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी जमीन मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है. इसी क्रम में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का हालिया उत्तर प्रदेश दौरा और उनके बयान राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा को जन्म दे रहे हैं. खासकर उनका यह कहना कि अब दरी बिछाने की राजनीति नहीं होगी, हिस्सेदारी और बराबरी की लड़ाई होगी, इस बात का संकेत माना जा रहा है कि ओवैसी अब सिर्फ चुनावी मौजूदगी दर्ज कराने नहीं, बल्कि सत्ता की राजनीति में वास्तविक हिस्सेदारी हासिल करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं.
बहराइच के मटेरा में आयोजित जनसभा में ओवैसी ने साफ कर दिया कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे को केंद्र में रखेगी. उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई भाजपा को रोकना चाहता है तो एआईएमआईएम सम्मानजनक साझेदारी के लिए तैयार है. यह बयान केवल एक राजनीतिक संदेश नहीं, बल्कि संभावित गठबंधन की दिशा में फेंका गया संकेत भी माना जा रहा है.
